 Late Devi Chand Jain
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सब पाकर, सब छोड़ गये वो, किस्मत से ज्यादा कर्म पर विश्वास करते थे हर मुश्किलों को हंसते हुए टाल देते, अपने लिए नहीं दूसरों के लिये जिया करते वो कभी मायूस न हुये चाहे कितने भी तूफान आये, अपने कर्मों से हाथों की लकीरें बनाना जानते थे वो जाते-जाते दे गये हम सब को एक सीख, किसी का न बुरा करना, न बुरा सोचना, जो बुरा करे उसका भी अच्छा करना, हमेशा अपने अच्छे कर्म और अच्छी सोच से आगे बढ़ना, जिन्दगी के फलसफे सिखा गये वो उन्नती की राह दिखा गये वो ईश्वर से पहले पूजते हैं उन्हें हम प्रेरणा और स्नेह की मूरत हैं वो दूर होकर भी हमेशा साथ हैं हम सबके सिर पर हमेशा उनका हाथ है इस जन्म में इतना ही सही अगले जन्म फिर हमारे पास होंगे वो कहां जायेंगे हमें छोड़कर, हमारे प्यारे पापा हैं वो
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Prakash Devi Jain
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